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निविदा प्रबंधन समाधान नीति 2019

सुशासन नीति 09 Sep, 2026
निविदा प्रबंधन समाधान नीति 2019

सरकारी एवं निजी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए निविदा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सड़क, भवन, पुल, सिंचाई, विद्युत, तकनीकी सेवाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा अन्य क्षेत्रों में सरकार और संस्थाएँ विभिन्न कंपनियों, फर्मों एवं संस्थानों से कार्य कराती हैं।

भारतीय पहचान प्रणाली आधारित पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह निविदा व्यवस्था

“निविदा केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, अनुभव, क्षमता, सत्यापन और कार्य की गुणवत्ता के आधार पर दी जानी चाहिए।”

प्रस्तावना

सरकारी एवं निजी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए निविदा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सड़क, भवन, पुल, सिंचाई, विद्युत, तकनीकी सेवाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा अन्य क्षेत्रों में सरकार और संस्थाएँ विभिन्न कंपनियों, फर्मों एवं संस्थानों से कार्य कराती हैं।

वर्तमान में निविदा प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का प्रयास किया गया है, लेकिन केवल आवेदन और दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड कर देने से पूरी व्यवस्था पारदर्शी नहीं बन जाती। वास्तविक चुनौती आवेदक की पहचान, योग्यता, अनुभव, आर्थिक क्षमता, उपलब्ध संसाधनों, पूर्व कार्यों और कार्य की गुणवत्ता का विश्वसनीय सत्यापन है।

प्रस्तावित निविदा प्रबंधन समाधान नीति का उद्देश्य ऐसी डिजिटल व्यवस्था विकसित करना है जिसमें निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड उपलब्ध हो और किसी व्यक्ति अथवा अधिकारी की व्यक्तिगत पसंद अथवा हस्तक्षेप की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।


1. वर्तमान निविदा व्यवस्था की प्रमुख समस्याएँ

निविदा प्रक्रिया में सामान्यतः कई प्रकार की चुनौतियाँ सामने आती हैं—

  • दस्तावेजों की सत्यता की जाँच में कठिनाई

  • एक ही दस्तावेज को अलग-अलग निविदाओं में बार-बार प्रस्तुत करना

  • अनुभव एवं पूर्व कार्यों की वास्तविक पुष्टि में समस्या

  • कंपनियों की वास्तविक तकनीकी क्षमता का स्पष्ट आकलन न होना

  • आर्थिक एवं मानव संसाधनों की पर्याप्त जानकारी का अभाव

  • कार्य पूरा होने के बाद गुणवत्ता का प्रभावी रिकॉर्ड न होना

  • निविदा प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की अधिक संभावना

  • आवेदन अस्वीकृत होने पर स्पष्ट कारण की जानकारी न मिलना

  • अलग-अलग विभागों में अलग-अलग सत्यापन प्रक्रियाएँ

इसलिए आवश्यकता ऐसी प्रणाली की है जिसमें पहचान से लेकर निविदा, कार्य आवंटन, कार्य की प्रगति और अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से जुड़ी हो।


2. भारतीय पहचान प्रणाली से जुड़ी निविदा व्यवस्था

हमारी प्रस्तावित व्यवस्था में भारतीय पहचान प्रणाली को निविदा प्रबंधन की मूल पहचान प्रणाली के रूप में उपयोग करने की परिकल्पना की गई है।

इसका उद्देश्य केवल व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि उससे संबंधित अधिकृत रिकॉर्ड को एक व्यवस्थित डिजिटल प्रोफाइल से जोड़ना है।

किसी कंपनी, फर्म या संस्था का पंजीकरण करते समय उसके अधिकृत प्रतिनिधि की पहचान का सत्यापन किया जाएगा।

इसके साथ संबंधित संस्था की—

  • तकनीकी योग्यता

  • व्यावसायिक अनुभव

  • पंजीकरण विवरण

  • विशेषज्ञता

  • उपलब्ध संसाधन

  • पूर्व कार्य

  • कार्य पूर्णता का रिकॉर्ड

  • वित्तीय एवं वैधानिक अनुपालन

जैसी जानकारी को उसके डिजिटल प्रोफाइल से जोड़ा जा सकेगा।

इससे प्रत्येक पंजीकृत संस्था की एक डिजिटल निविदा प्रोफाइल तैयार होगी।


3. एक बार सत्यापन, बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम

वर्तमान व्यवस्था में एक ही संस्था को अलग-अलग निविदाओं के लिए बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।

प्रस्तावित प्रणाली में एक बार सत्यापित जानकारी को संबंधित डिजिटल प्रोफाइल से जोड़ा जाएगा। इसके बाद नई निविदा में पात्रता के अनुरूप उपलब्ध रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सकेगा।

इससे—

कम कागजी कार्यवाही → कम समय → कम मानवीय हस्तक्षेप → अधिक पारदर्शिता

का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है।

हालाँकि संवेदनशील अथवा समय-सीमा वाले प्रमाणपत्रों का आवश्यकता के अनुसार पुनः सत्यापन किया जाएगा।


4. निविदा पंजीकरण प्रणाली

प्रस्तावित व्यवस्था में कंपनी, फर्म या संस्था को पहले निविदा पंजीकरण एवं इंपैनलमेंट प्रणाली में पंजीकृत होना होगा।

पंजीकरण के समय संस्था से उसके कार्यक्षेत्र और क्षमता से संबंधित आवश्यक जानकारी ली जाएगी।

उदाहरण के लिए—

सिविल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर
  • सिविल इंजीनियरिंग

  • स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग

  • आर्किटेक्चर

  • निर्माण एवं इंफ्रास्ट्रक्चर

इलेक्ट्रिकल एवं डिजिटल तकनीक
  • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • कंप्यूटर इंजीनियरिंग

  • रोबोटिक्स

  • मेकाट्रॉनिक्स

  • मैक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स

मैकेनिकल एवं औद्योगिक क्षेत्र
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग

  • ऑटोमोटिव

  • एयरोस्पेस

  • बायोमेडिकल

  • बायोमैकेनिकल

पर्यावरण एवं सामग्री विज्ञान
  • मटेरियल साइंस

  • एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग

  • केमिकल इंजीनियरिंग

  • एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग

  • सस्टेनेबिलिटी एवं डिजाइन

अन्य विशेषज्ञ क्षेत्र
  • माइनिंग

  • जियोलॉजिकल इंजीनियरिंग

  • मरीन इंजीनियरिंग

  • न्यूक्लियर इंजीनियरिंग

  • नैनोटेक्नोलॉजी

  • मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग

  • पेट्रोलियम

  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

संस्था की वास्तविक योग्यता और विशेषज्ञता के आधार पर उसे संबंधित कार्यक्षेत्र में पंजीकृत किया जाएगा।


5. संस्था की डिजिटल प्रोफाइल

प्रत्येक पंजीकृत संस्था की एक डिजिटल प्रोफाइल होगी। इस प्रोफाइल में आवश्यकता के अनुसार निम्न जानकारी रखी जा सकती है—

संस्था की पहचान → विशेषज्ञता → योग्य कर्मचारी → तकनीकी संसाधन → पूर्व कार्य → अनुभव → कार्य की गुणवत्ता → वर्तमान परियोजनाएँ → अनुपालन स्थिति

इससे संबंधित विभाग को यह समझने में सहायता मिलेगी कि कौन-सी संस्था किस प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त है।


6. निविदा के लिए स्वतः पात्र संस्थाओं की पहचान

जब किसी विभाग को कोई कार्य कराना होगा, तो वह डिजिटल प्रणाली में उस कार्य की आवश्यकताएँ दर्ज करेगा।

जैसे—

  • कार्य का प्रकार

  • तकनीकी योग्यता

  • आवश्यक अनुभव

  • अनुमानित लागत

  • समय-सीमा

  • आवश्यक संसाधन

  • कार्य का क्षेत्र

  • गुणवत्ता मानक

इसके बाद प्रणाली में उपलब्ध पंजीकृत संस्थाओं के रिकॉर्ड के आधार पर प्रारंभिक पात्र संस्थाओं की सूची तैयार की जा सकती है।

इससे ऐसी संस्थाओं को निविदा प्रक्रिया में आमंत्रित किया जा सकेगा जो निर्धारित मानकों को पूरा करती हों।


7. निविदा चयन में योग्यता और क्षमता को प्राथमिकता

प्रस्तावित व्यवस्था में केवल कम कीमत देने को ही चयन का आधार नहीं माना जाना चाहिए।

किसी संस्था का मूल्यांकन कई आधारों पर किया जा सकता है—

तकनीकी क्षमता

संस्था के पास आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधन हैं या नहीं।

अनुभव

उसने पहले किस प्रकार के कार्य किए हैं और उनका परिणाम कैसा रहा।

मानव संसाधन

कार्य पूरा करने के लिए पर्याप्त योग्य कर्मचारी एवं विशेषज्ञ उपलब्ध हैं या नहीं।

कार्य गुणवत्ता

पूर्व कार्यों की गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्ण करने का रिकॉर्ड।

समय-सीमा

संस्था निर्धारित समय में कार्य पूरा करने की क्षमता रखती है या नहीं।

वित्तीय क्षमता

संस्था प्रस्तावित परियोजना को पूरा करने की आर्थिक क्षमता रखती है या नहीं।

इस प्रकार निविदा चयन को गुणवत्ता, क्षमता, अनुभव और उचित लागत के संतुलन पर आधारित किया जा सकता है।


8. सरकारी कर्मचारी और हितों का टकराव

यदि किसी व्यक्ति या संस्था का संबंधित निविदा से प्रत्यक्ष हितों का टकराव हो, तो उसे उस निविदा में भाग लेने से रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे।

सरकारी पद पर कार्यरत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हितों के टकराव संबंधी नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

इससे निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।


9. दस्तावेज सत्यापन की डिजिटल व्यवस्था

हमारी प्रस्तावित पहचान प्रणाली में दस्तावेजों की केवल फाइल अपलोड करना पर्याप्त नहीं होगा।

जहाँ संभव हो, प्रमाणपत्र और संबंधित जानकारी को अधिकृत स्रोतों से डिजिटल रूप से सत्यापित किया जाएगा।

उदाहरण के लिए—

शैक्षिक योग्यता → संबंधित अधिकृत रिकॉर्ड से सत्यापन

व्यावसायिक पंजीकरण → संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से सत्यापन

पूर्व सरकारी कार्य → संबंधित विभाग के कार्य रिकॉर्ड से सत्यापन

इस प्रकार नकली अथवा गलत दस्तावेजों के आधार पर पात्रता प्राप्त करने की संभावना को कम किया जा सकेगा।


10. संस्था की रैंकिंग और कार्य क्षमता

प्रस्तावित प्रणाली में प्रत्येक संस्था का एक कार्य प्रदर्शन रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

इसमें—

  • समय पर कार्य पूर्ण हुआ या नहीं

  • निर्धारित गुणवत्ता प्राप्त हुई या नहीं

  • परियोजना में कितनी देरी हुई

  • स्वीकृत लागत और वास्तविक लागत

  • शिकायतों की स्थिति

  • निरीक्षण रिपोर्ट

  • कार्य पूर्णता प्रमाण

  • संबंधित विभाग का मूल्यांकन

जैसे रिकॉर्ड शामिल किए जा सकते हैं।

इसका उद्देश्य किसी संस्था को मनमाने ढंग से रैंक करना नहीं, बल्कि वास्तविक कार्य प्रदर्शन के आधार पर पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना होगा।


11. कार्य मिलने के बाद भी निगरानी

निविदा मिलने के बाद संस्था की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी।

प्रस्तावित प्रणाली में परियोजना की पूरी अवधि का डिजिटल प्रबंधन किया जा सकता है।

निविदा स्वीकृति → कार्य आदेश → कार्य प्रारंभ → प्रगति → निरीक्षण → गुणवत्ता परीक्षण → कार्य पूर्णता → भुगतान

इन सभी चरणों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।

इससे यह स्पष्ट रहेगा कि किस परियोजना की जिम्मेदारी किस संस्था और किस अधिकारी के पास है।


12. कार्य की गुणवत्ता का डिजिटल मूल्यांकन

किसी भी सरकारी परियोजना की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि काम पूरा हो गया।

यह भी देखा जाना चाहिए कि काम निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार हुआ या नहीं।

इसलिए संबंधित परियोजना में—

  • निरीक्षण रिपोर्ट

  • गुणवत्ता परीक्षण

  • फोटो/वीडियो रिकॉर्ड

  • कार्य की प्रगति

  • निर्धारित मानकों की पूर्ति

जैसी जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जा सकती है।

इससे भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना आसान होगा।


13. भुगतान व्यवस्था

प्रस्तावित प्रणाली में भुगतान को कार्य की प्रगति और सत्यापित गुणवत्ता से जोड़ने की परिकल्पना है।

उदाहरण के रूप में—

कार्य का चरण पूरा → डिजिटल निरीक्षण → गुणवत्ता पुष्टि → स्वीकृति → भुगतान

इस प्रकार बिना कार्य पूर्ण किए या निर्धारित मानकों को पूरा किए भुगतान की संभावना को कम किया जा सकता है।


14. निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता

प्रस्तावित प्रणाली में प्रत्येक निविदा के लिए एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।

इसमें अधिकृत स्तर पर यह जानकारी उपलब्ध हो सकती है—

  • निविदा कब जारी हुई

  • कितनी संस्थाएँ पात्र थीं

  • किन संस्थाओं ने आवेदन किया

  • पात्रता किस आधार पर निर्धारित हुई

  • चयन के मानदंड क्या थे

  • किस संस्था को कार्य मिला

  • कार्य की लागत क्या है

  • कार्य की समय-सीमा क्या है

  • कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है

इससे निविदा प्रक्रिया की जवाबदेही बढ़ाने में सहायता मिलेगी।


15. अस्वीकृत संस्था को सुधार का अवसर

यदि कोई संस्था निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती है, तो उसके आवेदन को अस्वीकार करने के साथ अस्वीकृति के कारण स्पष्ट रूप से डिजिटल प्रणाली में दर्ज किए जाने चाहिए।

संस्था अपनी कमी को दूर करने के बाद पुनः आवेदन कर सकेगी।

इससे किसी अधिकारी की व्यक्तिगत पसंद या नापसंद के बजाय निर्धारित नियमों के आधार पर प्रक्रिया संचालित करने में सहायता मिलेगी।


16. भ्रष्टाचार कम करने के लिए डिजिटल नियंत्रण

इस नीति का महत्वपूर्ण उद्देश्य निविदा प्रक्रिया में अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है।

जहाँ सत्यापन, पात्रता, दस्तावेज, कार्य प्रगति और भुगतान जैसे कार्य डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित होंगे, वहाँ पूरी प्रक्रिया का ऑडिट करना आसान होगा।

साथ ही प्रत्येक अधिकारी की भूमिका और कार्रवाई का डिजिटल लॉग रखा जा सकता है।

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि—

किस अधिकारी ने किस फाइल पर कब कार्रवाई की, क्या निर्णय लिया और किस आधार पर लिया।


17. निविदा की वास्तविक आवश्यकता का पूर्वानुमान

हमारी पहचान एवं डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को केवल निविदा आवेदन तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

सरकार के विभिन्न विभागों की भविष्य की आवश्यकताओं का डिजिटल डेटा तैयार किया जा सकता है।

इससे यह अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी कि आने वाले समय में किस क्षेत्र में—

  • कितने निर्माण कार्य

  • कितनी तकनीकी सेवाएँ

  • कितने उपकरण

  • कितनी सामग्री

  • कितने विशेषज्ञ

  • कितनी परियोजनाएँ

की आवश्यकता हो सकती है।

इसके आधार पर सरकार पहले से निविदा एवं संसाधन योजना तैयार कर सकेगी।


18. निजी और सरकारी क्षेत्र का एकीकृत डेटा प्रबंधन

प्रस्तावित नीति में सरकारी तथा निजी क्षेत्र से संबंधित अधिकृत निविदा डेटा को एक व्यवस्थित डिजिटल ढाँचे में रखने की परिकल्पना है।

इससे सरकार को यह समझने में सहायता मिल सकती है कि देश में कौन-सी संस्थाएँ किस क्षेत्र में कार्य कर रही हैं और उनके पास किस प्रकार की विशेषज्ञता एवं संसाधन उपलब्ध हैं।

यह जानकारी भविष्य की विकास योजनाओं में उपयोगी हो सकती है।


19. भारतीय पहचान प्रणाली की भूमिका

भारतीय पहचान प्रणाली इस पूरी व्यवस्था में विश्वसनीय पहचान और सत्यापन की आधारभूत परत के रूप में काम करने की परिकल्पना रखती है।

इसमें व्यक्ति, संस्था, विशेषज्ञ, कर्मचारी और परियोजना से संबंधित अधिकृत जानकारी को उचित अधिकारों के साथ जोड़ा जा सकता है।

लेकिन पहचान प्रणाली का उपयोग करते समय गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, सीमित अभिगम और कानूनी संरक्षण को अनिवार्य आधार बनाया जाना चाहिए।

किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी केवल अधिकृत उद्देश्य के लिए ही उपयोग की जानी चाहिए।


20. हमारी प्रस्तावित व्यवस्था का मूल मॉडल

भारतीय पहचान

व्यक्ति/संस्था का सत्यापन

योग्यता एवं विशेषज्ञता का सत्यापन

डिजिटल इंपैनलमेंट

निविदा आवश्यकता का डिजिटल पंजीकरण

पात्र संस्थाओं की पहचान

पारदर्शी निविदा प्रक्रिया

तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन

कार्य आवंटन

डिजिटल कार्य निगरानी

गुणवत्ता सत्यापन

कार्य पूर्णता

डिजिटल भुगतान एवं प्रदर्शन रिकॉर्ड

निविदा समाधान नीति के प्रमुख लाभ

1. पारदर्शिता

निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड।

2. वास्तविक सत्यापन

योग्यता, अनुभव और संस्था की पहचान का व्यवस्थित सत्यापन।

3. भ्रष्टाचार में कमी

अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करने की संभावना।

4. योग्य संस्थाओं को अवसर

कार्य की आवश्यकता के अनुसार योग्य एवं सक्षम संस्थाओं को आमंत्रित करना।

5. कार्य की गुणवत्ता

निविदा मिलने के बाद भी परियोजना की निरंतर निगरानी।

6. जवाबदेही

अधिकारी, संस्था और परियोजना से संबंधित कार्रवाई का रिकॉर्ड।

7. समय की बचत

बार-बार कागजी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम होना।

8. डिजिटल रिकॉर्ड

प्रत्येक संस्था और परियोजना का व्यवस्थित कार्य प्रदर्शन रिकॉर्ड।


निष्कर्ष

निविदा व्यवस्था किसी भी देश के विकास कार्यों का महत्वपूर्ण आधार है। यदि निविदा प्रक्रिया पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और जवाबदेह होगी, तो सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है।

निविदा प्रबंधन समाधान नीति 2019 का उद्देश्य केवल वर्तमान ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था को बदलना नहीं, बल्कि उसके आगे एक ऐसी एकीकृत डिजिटल प्रबंधन प्रणाली की परिकल्पना करना है, जिसमें संस्था की पहचान से लेकर उसकी योग्यता, अनुभव, निविदा चयन, कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और भुगतान तक पूरी प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी हो।

हमारी परिकल्पना में भारतीय पहचान प्रणाली + डिजिटल सत्यापन + संस्था इंपैनलमेंट + पारदर्शी निविदा चयन + कार्य गुणवत्ता निगरानी एक साथ काम करेंगे।

इससे निविदा व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

हमारा संकल्प

“योग्यता के आधार पर अवसर, पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर चयन और गुणवत्ता के आधार पर मूल्यांकन—यही एक मजबूत एवं जवाबदेह निविदा व्यवस्था की आधारशिला है।”


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