डिजिटल पहचान एवं नागरिक अधिकार (Digital Identity & Citizen Rights)
एक ऐसी राष्ट्रीय पहचान व्यवस्था की परिकल्पना, जिसके माध्यम से नागरिकता की त्वरित पुष्टि हो तथा नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएँ सरल, पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकें।
भारतीय पहचान प्रणाली: एक राष्ट्रीयता, एक पहचान
एक ऐसी राष्ट्रीय पहचान व्यवस्था की परिकल्पना, जिसके माध्यम से नागरिकता की त्वरित पुष्टि हो तथा नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएँ सरल, पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकें।
प्रस्तावना
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में प्रत्येक नागरिक की पहचान की विश्वसनीय पुष्टि अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में नागरिकों की पहचान के लिए अनेक प्रकार के दस्तावेज और पहचान पत्र उपयोग किए जाते हैं। अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग प्रमाणपत्र और दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारतीय पहचान प्रणाली की एक ऐसी परिकल्पना प्रस्तुत की गई है, जिसमें नागरिक की मूल पहचान को एक केंद्रीय पहचान संख्या से जोड़ा जाए और उसी के आधार पर विभिन्न सरकारी सेवाओं एवं दस्तावेजों को सरल बनाया जा सके।
इस प्रस्ताव का मूल विचार है—
“एक राष्ट्रीयता, एक पहचान।”
इस व्यवस्था के अनुसार नागरिक की पहचान और नागरिकता की पुष्टि एक सुरक्षित डिजिटल प्रणाली के माध्यम से शीघ्र की जा सके तथा नागरिक को बार-बार अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में जाने की आवश्यकता न पड़े।
भारतीय नागरिकता और संवैधानिक व्यवस्था
भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान संविधान के भाग-2 में अनुच्छेद 5 से 11 तक दिए गए हैं। इन अनुच्छेदों में नागरिकता प्राप्त करने, नागरिकता से संबंधित अधिकारों तथा संसद की शक्तियों का उल्लेख किया गया है।
अनुच्छेद 5 — भारतीय नागरिकता का अधिकार
अनुच्छेद 5 संविधान लागू होने के समय भारत में निवास करने वाले कुछ व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित प्रावधान करता है। इसमें जन्म और माता-पिता से संबंधित परिस्थितियों के आधार पर नागरिकता का उल्लेख किया गया है।
अनुच्छेद 6 — भारत में प्रवास के माध्यम से नागरिकता
यह प्रावधान विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित परिस्थितियों को निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 7 — पाकिस्तान प्रवास के बाद नागरिकता
यह उन व्यक्तियों से संबंधित है जो विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए और बाद में भारत लौटे। विशेष परिस्थितियों में उनकी नागरिकता से संबंधित प्रावधान निर्धारित किए गए।
अनुच्छेद 8 — विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति
यह भारतीय मूल के उन व्यक्तियों से संबंधित है जो विदेश में रहते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भारतीय नागरिकता से संबंधित अधिकार प्राप्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 9 — विदेशी नागरिकता प्राप्त करने का प्रभाव
इस अनुच्छेद में स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति की भारतीय नागरिकता से संबंधित प्रावधान दिया गया है।
अनुच्छेद 10 — नागरिकता के अधिकार का संरक्षण
यह अनुच्छेद नागरिकता के अधिकार की निरंतरता से संबंधित है और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन नागरिकता के अधिकारों को निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 11 — संसद की शक्ति
अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता से संबंधित विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
नागरिकता अधिनियम, 1955
भारतीय नागरिकता से जुड़े विषयों को आगे व्यवस्थित करने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 महत्वपूर्ण कानून है। प्रस्ताव में नागरिकता प्राप्त करने और समाप्त होने से संबंधित विभिन्न माध्यमों का उल्लेख किया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार नागरिकता प्राप्त करने के प्रमुख आधार हैं—
जन्म के आधार पर
वंश के आधार पर
पंजीकरण द्वारा
प्राकृतिककरण द्वारा
भारत में सम्मिलित क्षेत्रों के आधार पर
इसी प्रकार नागरिकता समाप्त होने के संदर्भ में त्याग, निष्कासन और अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
वर्तमान पहचान व्यवस्था की चुनौती
प्रस्ताव में यह प्रश्न उठाया गया है कि वर्तमान में उपयोग किए जा रहे विभिन्न पहचान दस्तावेज किसी व्यक्ति की पहचान तो प्रमाणित कर सकते हैं, लेकिन नागरिकता की त्वरित और एकीकृत पुष्टि के लिए एक केंद्रीय व्यवस्था की आवश्यकता महसूस होती है।
वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग प्रमाणपत्र और पहचान पत्रों का उपयोग किया जाता है। ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि विशेष परिस्थितियों में जटिल हो सकती है।
प्रस्ताव का उद्देश्य इसी चुनौती के लिए एक ऐसी एकीकृत भारतीय पहचान प्रणाली विकसित करना है, जिसमें नागरिक की मूल पहचान एक सुरक्षित केंद्रीय संख्या से जुड़ी हो।
भारतीय पहचान संख्या
प्रस्तावित भारतीय पहचान संख्या केवल एक संख्या के रूप में होगी। इसके लिए अलग से कोई पहचान कार्ड या प्रमाणपत्र जारी करने की परिकल्पना नहीं की गई है।
इस संख्या का उद्देश्य नागरिक की पहचान और नागरिकता की त्वरित पुष्टि करना होगा।
इस व्यवस्था में भारतीय पहचान संख्या को नागरिक की विभिन्न सरकारी सेवाओं और पहचान संबंधी आवश्यकताओं का आधार बनाया जाएगा।
भारतीय पहचान संख्या की प्रमाणिकता
प्रस्ताव में भारतीय पहचान संख्या को सुरक्षित डिजिटल प्रणाली के माध्यम से विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसके लिए सुरक्षित पुस्तकालय, मॉडल-व्यू-कंट्रोलर आधारित संरचना तथा ब्लॉकचेन आधारित अनुप्रयोग का उल्लेख किया गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था में सरकार द्वारा नागरिकता संबंधी अभिलेखों के आधार पर सुरक्षित आँकड़ा भंडार तैयार करने तथा नागरिकों के लिए एक अनुप्रयोग उपलब्ध कराने की परिकल्पना है।
नागरिक इस अनुप्रयोग के माध्यम से अपनी पहचान की पुष्टि कर सकेगा और इसके बाद जैविक पहचान प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
एक पहचान संख्या से अनेक सरकारी सेवाएँ
इस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि नागरिक को प्रत्येक सरकारी सेवा के लिए अलग-अलग प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
भारतीय पहचान संख्या की पुष्टि के आधार पर विभिन्न सेवाओं और दस्तावेजों के लिए डिजिटल आवेदन किया जा सकेगा।
प्रस्ताव में निम्नलिखित प्रमुख पहचान एवं सेवा संख्याओं की परिकल्पना की गई है।
1. जन्म प्रमाण-पत्र
बच्चे के जन्म के समय माता-पिता तथा चिकित्सक या अधिकृत अधिकारी द्वारा सत्यापन के आधार पर जन्म का डिजिटल अभिलेख तैयार करने की परिकल्पना की गई है।
जन्म के साथ ही बच्चे की भारतीय पहचान संख्या से उसका रिकॉर्ड जोड़ा जा सकेगा।
2. स्थायी शिक्षा संख्या
स्थायी शिक्षा संख्या बच्चे के प्रारंभिक विद्यालयी नामांकन के समय भारतीय पहचान संख्या से जुड़ी होगी।
इससे विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन को सरल बनाने की परिकल्पना की गई है।
3. मतदाता संख्या
18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भारतीय पहचान संख्या के सत्यापन के आधार पर मतदाता संख्या स्वतः सक्रिय करने की परिकल्पना की गई है।
प्रस्ताव में इसके साथ सत्यापन मतदान अनुप्रयोग, लाइव मतदान मशीन और डिजिटल मतदान प्रणाली को जोड़ने का विचार दिया गया है।
इस व्यवस्था के अनुसार मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार को किसी अन्य स्थान से भी मतदान कर सकेगा। प्रस्ताव में इस व्यवस्था के माध्यम से मतदान प्रतिशत को बहुत अधिक बढ़ाने की संभावना व्यक्त की गई है।
4. स्थायी खाता संख्या
प्रस्ताव में भारतीय पहचान संख्या के आधार पर स्थायी खाता संख्या को स्वतः उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।
इसके माध्यम से व्यक्ति की आय और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित आँकड़ों को व्यवस्थित करने तथा कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।
5. सुविधा संख्या
सुविधा संख्या का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, जरूरतमंद, दिव्यांग तथा अन्य पात्र नागरिकों को सरकारी सुविधाओं से सीधे जोड़ना है।
प्रस्ताव में राशन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, यात्रा सहायता तथा आपदा के समय सहायता जैसी सेवाओं को एकीकृत करने की परिकल्पना की गई है।
6. स्थायी संपत्ति संख्या
स्थायी संपत्ति संख्या के माध्यम से भूमि अभिलेख, खसरा, खतौनी, मकान और अन्य संपत्ति संबंधी विवरणों को भारतीय पहचान संख्या से जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
इसका उद्देश्य संपत्ति के स्वामित्व की पुष्टि, पंजीकरण तथा उत्तराधिकार की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है।
7. वाहन लाइसेंस संख्या
वाहन लाइसेंस संख्या के अंतर्गत आवेदन, सीखने की परीक्षा और वाहन परीक्षण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की परिकल्पना की गई है।
प्रस्ताव में अनुकरण प्रणाली के माध्यम से परीक्षण की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
8. पासपोर्ट संख्या
भारतीय पहचान संख्या के आधार पर पासपोर्ट संबंधी आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने की परिकल्पना की गई है।
प्रस्ताव में व्यक्ति के विभिन्न सत्यापनों को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने का विचार प्रस्तुत किया गया है।
9. स्थायी स्वास्थ्य संख्या
स्थायी स्वास्थ्य संख्या व्यक्ति के जन्म से ही उसकी भारतीय पहचान संख्या से जोड़ने की परिकल्पना है।
इसमें स्वास्थ्य संबंधी अभिलेखों को सुरक्षित रखने और चिकित्सा सेवाओं के बेहतर प्रबंधन की बात कही गई है।
10. स्थायी किसान संख्या
स्थायी किसान संख्या के माध्यम से किसानों और कृषि से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने का प्रस्ताव है।
इसके अंतर्गत कृषि भूमि, खेती, बीज, खाद, फसल, भंडारण और बिक्री जैसी आवश्यकताओं को एकीकृत प्रणाली से जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
11. कर्मचारी संख्या
कर्मचारी संख्या के माध्यम से रोजगार से संबंधित जानकारी को भारतीय पहचान संख्या से जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
इससे कर्मचारी के रोजगार, स्थानांतरण, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति जैसे विवरणों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने का लक्ष्य है।
12. स्थायी व्यवसाय संख्या
स्थायी व्यवसाय संख्या के माध्यम से छोटे और बड़े व्यवसायों के लिए सरल डिजिटल पंजीकरण की परिकल्पना की गई है।
इसका उद्देश्य व्यवसायिक संस्थाओं की पहचान को व्यवस्थित करना और फर्जी संस्थाओं की संभावना को कम करना है।
13. बेरोजगारी संख्या
प्रस्ताव में ऐसे लोगों के लिए बेरोजगारी संख्या की परिकल्पना की गई है जिनके पास स्थायी रोजगार या व्यवसाय नहीं है।
इससे बेरोजगारी के आँकड़ों को व्यवस्थित करने तथा रोजगार के अवसरों और मार्गदर्शन को सही व्यक्ति तक पहुँचाने का उद्देश्य रखा गया है।
14. स्थायी यात्रा संख्या
स्थायी यात्रा संख्या के माध्यम से रेल, बस और हवाई यात्रा से संबंधित पहचान को एकीकृत करने की परिकल्पना की गई है।
इससे यात्रा के समय पहचान की पुष्टि तथा दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में व्यक्ति की पहचान करने में सहायता मिलने का उद्देश्य है।
15. मुकदमा संख्या
किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज होने पर संबंधित जानकारी को एक विशिष्ट मुकदमा संख्या से जोड़ने का प्रस्ताव है।
इससे किसी व्यक्ति से संबंधित मामलों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।
16. मृत्यु प्रमाण-पत्र संख्या
व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी भारतीय पहचान संख्या से जुड़ी सेवाओं को निष्क्रिय करने तथा मृत्यु की पुष्टि को सरल बनाने की परिकल्पना की गई है।
डिजिटल जनगणना की परिकल्पना
भारतीय पहचान संख्या के माध्यम से देश की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक आँकड़ों को लगातार अद्यतन रखने की परिकल्पना की गई है।
प्रस्ताव में रोजगार, बेरोजगारी, स्वरोजगार, गरीबी, विभिन्न सामाजिक समूहों तथा देश में आने-जाने वाले लोगों से संबंधित आँकड़ों को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने का विचार रखा गया है।
ऐसी व्यवस्था से विकास की योजनाओं, संसाधनों की आवश्यकता और भविष्य के बुनियादी ढाँचे की योजना बनाने में सहायता मिलने की परिकल्पना की गई है।
एक पहचान, अनेक सुविधाएँ
भारतीय पहचान प्रणाली की मूल अवधारणा यह है कि नागरिक की एक सत्यापित पहचान के आधार पर अलग-अलग सरकारी सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जा सके।
प्रस्ताव के अनुसार नागरिक घर बैठे अपनी पहचान की पुष्टि कर सकेगा और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न विभागों को डिजिटल अनुरोध भेज सकेगा।
बैंक खाता खोलने, ऋण लेने, नौकरी के लिए आवेदन करने, व्यवसायिक अनुमति प्राप्त करने, दुर्घटना में व्यक्ति की पहचान करने तथा आपदा के समय सहायता पहुँचाने जैसी सेवाओं को सरल बनाने की परिकल्पना की गई है।
भ्रष्टाचार कम करने और सरकारी सेवाओं को सरल बनाने की परिकल्पना
इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।
यदि नागरिक की पहचान, उसके दस्तावेज और विभिन्न सरकारी सेवाएँ एक सुरक्षित डिजिटल प्रणाली से जुड़ी हों, तो बार-बार दस्तावेज जमा करने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
प्रस्ताव के अनुसार इससे नागरिक का समय और धन बच सकता है तथा सरकार को देश के संसाधनों और भविष्य की आवश्यकताओं की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
हमारा संकल्प — एक राष्ट्रीयता, एक पहचान
भारतीय पहचान प्रणाली केवल एक पहचान संख्या की परिकल्पना नहीं है। यह नागरिक की पहचान, सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, संपत्ति, व्यवसाय, यात्रा और अन्य आवश्यकताओं को एक सुरक्षित डिजिटल ढाँचे से जोड़ने का प्रस्ताव है।
इसका व्यापक उद्देश्य है—
सरल सेवा, सुरक्षित पहचान और पारदर्शी व्यवस्था।
एक ऐसी व्यवस्था की परिकल्पना जिसमें नागरिक को अपनी पहचान सिद्ध करने के लिए बार-बार अलग-अलग दस्तावेज लेकर सरकारी कार्यालयों में न जाना पड़े और सरकार को भी योजनाओं तथा सेवाओं को सही व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए अधिक व्यवस्थित जानकारी उपलब्ध हो।
“एक राष्ट्रीयता, एक पहचान” इसी विचार को आगे बढ़ाने का संकल्प है।
प्रस्तावक
अम्बरीश देव गुप्ता
भारत महापरिवार पार्टी
मोबाइल: 9335222275, 8081222255
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